माँ भी मेरी, तुम भी मेरी ❤️
तुमसे मोहब्बत है मुझे दिल की हर धड़कन से, प्रिये, माँ से रिश्ता जुड़ा है मेरी हर साँस से, प्रिये। तुम दोनों मेरे जीवन की दो अनमोल कड़ियाँ हो, एक मेरी माँ है, एक मेरी ज़िंदगी हो। ❤️
मुझे पता है, हर बात तुम्हें अच्छी नहीं लगती, हर रिश्ते में हर बात हमेशा सच्ची नहीं लगती। कभी उनकी कोई बात तुम्हारे दिल को दुखा जाती है, कभी तुम्हारी कोई बात माँ की आँखें नम कर जाती है।
मैं ये नहीं कहता कि हर बात तुम सहती रहो, जो गलत लगे, उसके सामने चुप रहती रहो। बस इतना चाहता हूँ, जब कोई बात दिल दुखाए, मुझसे कह देना, पर गुस्सा हम दोनों के बीच न आए।
क्योंकि तुम माँ से जब भी नाराज़ हो जाती हो, मेरी धड़कनों को भी बेचैन कर जाती हो। तुम्हारा दर्द मुझे अंदर तक छू जाता है, और माँ का दर्द भी मुझे चैन कहाँ लेने देता है।
तुम दोनों के बीच खड़ा मैं सोचता रह जाता हूँ, किसका हाथ पकड़ूँ, किसको समझाऊँ—चुप हो जाता हूँ। एक तरफ़ मेरी माँ, जिसने मुझे जीना सिखाया, दूसरी तरफ़ तुम, जिसने जीवन को जीना सिखाया।
माँ मेरी जड़ हैं, तुम मेरी बहार हो, माँ मेरा सम्मान हैं, तुम मेरा प्यार हो। मैं किसी एक को चुनूँ—ये मुझसे न कहो, मेरी दुनिया को दो हिस्सों में यूँ न बाँटो।
अगर माँ कभी गलत हों, तो मैं उन्हें समझाऊँगा, अगर तुम गलत हो, तो तुम्हें भी समझाऊँगा। पर जब तुम दोनों में कोई बात बढ़ जाए, तो मुझे बीच में नहीं—अपने पास बुला लेना।
तुम्हें जो दर्द मिले, उसे मैं समझना चाहता हूँ, तुम्हारे हर आँसू का कारण जानना चाहता हूँ। बस मेरी एक बात तुम दिल में रख लेना, मुझसे शिकायत करना, मुझसे नाराज़ मत होना।
तुम मेरी मोहब्बत हो, माँ मेरा सम्मान है, तुम दोनों से ही तो मेरा पूरा जहान है। तुम दोनों अलग हो, फिर भी दोनों मेरी हो, एक मेरी जड़ है, एक मेरी ज़िंदगी हो।
इसलिए जब कभी दिल में गुस्सा भर जाए, और कोई बात तुम्हें अंदर तक रुला जाए, तो मेरी मोहब्बत को उस पल याद कर लेना, और जो कहना हो—मुझसे आकर कह देना। ❤️
माँ भी मेरी है, तुम भी मेरी हो, तुम दोनों के बिना अधूरी मेरी ज़िंदगी हो। तुम दोनों की मुस्कान में मेरी खुशी रहती है, तुम दोनों के प्यार में ही मेरी दुनिया बसती है। ❤️
— Aditya Ranjan